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अमेरिका में डेमोक्रेटिक सरकार के खिलाफ भारतीयों का विरोध, जानिए क्यों

Posted On:Tuesday, October 4, 2022

मुंबई, 04 अक्टूबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। अमेरिका के न्यूजर्सी में हाल ही में टीनेक डेमोक्रेटिक म्यूनिसिपल कमेटी (TDMC) के नेता के नेतृत्व में हिंदू संगठनों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इसमें विश्व हिंदू परिषद, सेवा इंटरनेशनल, हिंदू स्वयंसेवक संघ समेत 60 संगठनों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। TDMC डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी पार्टी है। इसके प्रस्ताव में लिखा है कि ये संगठन भारत और अमेरिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। दो डेमोक्रेटिक सांसदों को अमेरिका में सक्रिय हिंदू संगठनों की फंडिंग की जांच करने को कहा गया है। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अमेरिका के कई राज्यों में 60 से ज्यादा हिंदू संगठन डेमोक्रेटिक सरकार के खिलाफ उतर आए हैं। खासकर कैलिफोर्निया और न्यूजर्सी में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकारों के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ही अमेरिका में सत्ता में है।

न्यूजर्सी में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्टेट यूनिट ने इस हिंदू विरोधी प्रस्ताव को गलत बताया है। स्टेट यूनिट के प्रवक्ता ने दैनिक भास्कर को बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी का मूलभूत लक्ष्य लोगों को साथ लाना है, उन्हें बांटना नहीं। हिंदू विरोधी प्रस्ताव इस लक्ष्य के खिलाफ है। किसी भी रूप में नफरत और कट्टरता के खिलाफ हैं। तो वही अमेरिका के हिंदू संगठनों का कहना है कि इस प्रस्ताव में हिंदू संगठनों के बारे में बेहद आपत्तिजनक बातें की गई हैं। जबकि, इस प्रस्ताव को पेश करते समय हमें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया। प्रस्ताव एकतरफा सोच के तहत पारित कर दिया गया, जो कि नैतिक रूप से गलत है। इससे अमेरिका में रहने वाले हिंदुओं की छवि खराब हुई है। यह हमें बदनाम करने की साजिश है। कोई भी शांतिपूर्ण समुदाय पर दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाता है तो उसे भी इसका परिणाम भुगतना पड़ता है।

आपको बता दे, अमेरिका में पिछले दो महीने में हुईं घटनाओं को लेकर हिंदू विरोधी लोगों ने इन संगठनों पर निशाना साधा था। दरअसल भारतीय स्वतंत्रता दिसव के मौके पर अमेरिका में कई जगहों पर परेड में बुलडोजर को उपलब्धियों का प्रतीक बताने की कोशिश की गई थी। कई अमेरिकी संगठनों ने इसे बंटवारे और नफरत का प्रतीक बताकर आलोचना शुरू कर दी थी। इसके बाद सियासी और सामाजिक संगठनों ने अमेरिका में होने वाले साध्वी ऋतंभरा के कार्यक्रम का विरोध शुरू किया। इसलिए कार्यक्रम को ही रद्द करना पड़ा।


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