लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ में कॉमर्शियल और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने का असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। गैस की कमी के कारण घरों और छोटे कारोबारियों ने पारंपरिक चूल्हों की ओर रुख कर लिया है। शहर में कोयले की अंगीठी, भट्टी और मिट्टी के चूल्हों की बिक्री अचानक कई गुना बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो-तीन दिनों में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।
मवैया इलाके के एक दुकानदार विपिन कुमार के अनुसार पहले इन भट्टियों की बिक्री दिनभर में मुश्किल से एक-दो होती थी, लेकिन अब एक दिन में 35 से 40 तक बिक रही हैं। अचानक बढ़ी मांग के कारण दुकानों पर एडवांस ऑर्डर तक लेने पड़ रहे हैं, क्योंकि उत्पादन मांग के मुकाबले कम पड़ रहा है।
ज्यादातर मांग ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड बेचने वाले दुकानदारों की ओर से आ रही है, जो रोजाना खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भर रहते थे। गैस सिलेंडर आसानी से नहीं मिलने के कारण वे मजबूरन कोयले की भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुकानदार धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक कच्चे माल की कमी के कारण मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है और भट्टियों की कीमत 1200 रुपये से बढ़कर करीब 1500 रुपये तक पहुंच सकती है।
शहर के कई परिवार भी एहतियात के तौर पर अंगीठी और मिट्टी के चूल्हे खरीद रहे हैं। हालांकि दुकानदारों और ग्राहकों का कहना है कि कोयला या लकड़ी से खाना बनाना एलपीजी की तुलना में ज्यादा मेहनत वाला है, लेकिन गैस की अनिश्चित सप्लाई के कारण फिलहाल यही विकल्प बचा है।