लखनऊ न्यूज डेस्क: खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के असर से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी सामने आने लगी है, जिससे फास्ट फूड, चाय और पूड़ी-सब्जी के ठेलों का कारोबार लगभग ठप हो गया है। कई दुकानदारों ने अब खाना बनाने के लिए भट्ठी का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन जिन रेस्टोरेंट के किचन में भट्ठी लगाने की जगह नहीं है, उनके सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
गुरुवार को ऐशबाग, चिनहट और सीतापुर रोड के बाजारों में लोगों ने बड़ी संख्या में भट्ठियां खरीदीं। पहले 500 से 800 रुपये में मिलने वाली भट्ठियां अब 2000 से 3000 रुपये तक बिक रही हैं। कई दुकानदारों ने एडवांस देकर भट्ठियों की बुकिंग भी कराई है। इसके साथ ही ईंधन की कीमतों में भी तेजी आई है। एक सप्ताह पहले 25 रुपये किलो बिकने वाला इमली का कोयला 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गया, जबकि लकड़ी भी 20 रुपये से बढ़कर करीब 30 रुपये किलो बिकने लगी है।
कमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राजाजीपुरम और भूतनाथ इलाके में कई रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं। होटल संचालक अंकित अरोड़ा के मुताबिक तीन दिन से सिलेंडर न मिलने के कारण उनका कारोबार ठप हो गया है। वहीं अलीगंज में रेस्टोरेंट चलाने वाली निशा अग्रवाल का कहना है कि सिलेंडर की कमी से उन्हें आधा शटर गिराकर काम करना पड़ रहा है और किराया, बिजली और कर्मचारियों का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
दूसरी ओर घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति में देरी से इलेक्ट्रॉनिक बाजार में इंडक्शन कुकटॉप की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। दुकानदारों के अनुसार पिछले तीन दिनों में इंडक्शन की बिक्री करीब 50 प्रतिशत बढ़ गई है। स्टैंड वाली जाली लगे इंडक्शन की खास मांग है, जिन पर रोटी सेंकने के साथ बर्तन रखकर खाना भी बनाया जा सकता है। टिफिन सेवा चलाने वाले कई कारोबारी भी सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं और उनका काम प्रभावित हो रहा है।