लखनऊ न्यूज डेस्क: नोएडा में 13 अप्रैल को हुई श्रमिकों की हिंसा के मामले में सुरक्षा एजेंसियों की जांच अब गहरी होती जा रही है। इस उग्र आंदोलन और आगजनी के पीछे चार प्रमुख श्रमिक संगठनों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है, जिनमें लखनऊ स्थित एक प्रभावशाली संगठन भी शामिल है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ और एटीएस की टीमें अब इन संगठनों के नेटवर्क और उनके संचालकों की तलाश में जुटी हैं।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि 9 अप्रैल से शांतिपूर्ण चल रहा धरना 13 अप्रैल को अचानक एक सुनियोजित साजिश के तहत हिंसक हो गया था। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 45 से अधिक ऐसे बाहरी लोगों की पहचान की है, जो श्रमिक नहीं थे लेकिन भीड़ को उकसा रहे थे। इसी कड़ी में झारखंड निवासी आदित्य आनंद की गिरफ्तारी दक्षिण भारत से हुई है, जिसने पूछताछ में इन चार श्रमिक संगठनों के संलिप्त होने का खुलासा किया है।
एसटीएफ की टीमों ने लखनऊ स्थित संगठन के संचालक को पकड़ने के लिए कई ठिकानों पर छापेमारी की है, हालांकि वह अभी फरार है। एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, आदित्य आनंद और लखनऊ के इस संगठन के संचालक के बीच लगातार बातचीत के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा, दो अन्य प्रादेशिक श्रमिक संगठन और एक महिला श्रमिक संगठन भी जांच के दायरे में हैं, जिन पर श्रमिकों को भड़काने और रसद व संसाधन उपलब्ध कराने का आरोप है।
सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल इन संगठनों के फंडिंग सोर्स और बाहरी संपर्कों की जांच कर रही हैं। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि पुख्ता सबूत मिलने के बाद इन संगठनों के नामों का सार्वजनिक खुलासा किया जाएगा। प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या इस हिंसा का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना था। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।