लखनऊ न्यूज डेस्क: एनआईए (NIA) की चार्जशीट में लखनऊ से संचालित अल-कायदा (AQIS) मॉड्यूल के खौफनाक तौर-तरीकों का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और स्थानीय संपर्कों के जरिए कट्टरपंथ फैलाने, भर्ती करने और आतंकी ट्रेनिंग देने का एक पूरा जाल बिछा रखा था। मॉड्यूल का मुख्य चेहरा मिन्हाज अहमद, सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुका और फिर टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से आतंकियों के संपर्क में आया।
चार्जशीट के मुताबिक, इस आतंकी गुट ने 'हकैक की दुनिया' जैसे टेलीग्राम ग्रुप्स बना रखे थे, जहाँ सदस्यों को प्रोपेगेंडा और ऑपरेशनल निर्देश दिए जाते थे। सदस्यों को आतंकी संगठन के प्रति वफादारी की शपथ (बैत) दिलाई जाती थी। फंडिंग के मोर्चे पर भी यह मॉड्यूल काफी सक्रिय था; मिन्हाज ने आतंकी गतिविधियों के लिए जम्मू-कश्मीर के एक संपर्क को 93,000 रुपये से अधिक की रकम भेजी थी। इन पैसों का इस्तेमाल नेटवर्क को मजबूत करने और ऑपरेशनल खर्चों के लिए किया जाता था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा आईईडी (IED) बनाने की ट्रेनिंग को लेकर हुआ है। मॉड्यूल के हैंडलर तौहीद अहमद शाह ने मिन्हाज को 'एक्सप्लोसिव कोर्स' नामक एक डिजिटल मैनुअल भेजा था, जिसमें घर में मौजूद सामानों से बम बनाने के तरीके बताए गए थे। मिन्हाज ने न केवल इन विस्फोटकों को तैयार किया, बल्कि उनका परीक्षण भी किया। फॉरेंसिक जांच में उसके ठिकानों से पोटेशियम नाइट्रेट और एल्युमीनियम पाउडर जैसे विस्फोटक पदार्थों की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, उसके पास से हथियार और कारतूस भी बरामद हुए थे।
एनआईए ने तौहीद अहमद शाह को इस पूरे मॉड्यूल की मुख्य कड़ी माना है, जो भर्ती करने वाले और हैंडलर के रूप में काम कर रहा था। तौहीद पहले से ही मारे गए आतंकियों और प्रतिबंधित संगठनों जैसे 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के संपर्क में था। उसने मिन्हाज को उकसाया कि वह और लोगों को भर्ती करे और उनके 'बैत' वीडियो तैयार करे। तौहीद ही वह शख्स था जिसने फंडिंग चैनलों को संभाला और बम बनाने से लेकर हथियार जुटाने तक के निर्देश दिए, जिससे वह इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड साबित हुआ।