लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को सहेजने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने एक बेहद सराहनीय और अनूठी पहल शुरू की है। विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) के अवसर पर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने शहर के 100 वर्ष से अधिक पुराने 'हेरिटेज पेड़ों' की मैपिंग और उनका कैटलॉग तैयार करने के आदेश जारी किए हैं।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
ऐतिहासिक पेड़ों की पहचान: गोखले मार्ग पर महात्मा गांधी द्वारा रोपित बरगद का पेड़ और टीले वाली मस्जिद पर स्थित पुराना इमली का पेड़ इस सूची के प्रमुख आकर्षण होंगे। इसके अलावा, कैंट स्थित दिलकुशा गार्डन के लगभग 400 वर्ष पुराने बरगद को भी इस सूची में स्थान मिलेगा।
रिसर्च और मैपिंग: एलडीए की टीम NBRI (National Botanical Research Institute) के सहयोग से इन पेड़ों की प्रजाति, सटीक लोकेशन, उम्र और उनके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत शोध करेगी।
सार्वजनिक प्रदर्शन: तैयार किया गया पूरा कैटलॉग लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आम नागरिक और पर्यटक शहर की इस हरित विरासत के बारे में जान सकें।
संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
एलडीए उपाध्यक्ष ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य 'टाइलोसिस' (Tylosis) पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:
एक उम्र के बाद पेड़ों का तना अंदर से खोखला होने लगता है, जिससे पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है।
ऐसे में पेड़ अपनी बाहरी सतह (जड़ों के आसपास की जमीन) से पोषण लेते हैं।
पेड़ों के चारों तरफ RCC के पक्के चबूतरे बनाने से उन्हें पोषण नहीं मिल पाता और वे धीरे-धीरे सूख जाते हैं। इस अभियान के जरिए लोगों को चबूतरे न बनाने और पेड़ों को प्राकृतिक रूप से पनपने देने के लिए जागरूक किया जाएगा।
महत्व:
यह पहल न केवल लखनऊ की पुरानी पहचान को जीवित रखेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई चेतना भी जागृत करेगी। प्राधिकरण का उद्यान अनुभाग और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल (PMC) जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे।