लखनऊ न्यूज डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को करीब पांच महीने तक शपथ न दिलाए जाने के मामले में की है। अदालत ने कहा कि उसके पहले दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।
जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी और जस्टिस आलोक माथुर की खंडपीठ ने कहा कि 13 मई को कोर्ट ने सात दिनों के भीतर शपथ दिलाने का आदेश दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि आदेश के पालन में कोई कानूनी बाधा नहीं थी और देरी का कोई संतोषजनक कारण भी नहीं बताया गया।
यह मामला वार्ड-73 फैजुल्लागंज के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। चुनाव ट्रिब्यूनल ने 19 दिसंबर 2025 को पहले घोषित विजेता का चुनाव रद्द करते हुए सपा उम्मीदवार ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। इसके बावजूद उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने मेयर की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील लंबित होने के कारण शपथ नहीं दिलाई जा सकती। अदालत ने साफ कहा कि जब तक किसी सक्षम अदालत से स्थगन आदेश नहीं मिलता, तब तक ट्रिब्यूनल का फैसला तुरंत प्रभाव से लागू माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालतों के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मेयर की शक्तियों पर रोक सजा नहीं, बल्कि कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगाई गई है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।