लखनऊ न्यूज डेस्क: 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सड़क पर लेटकर और रेंगते हुए मंत्री आवास तक पहुंचे। अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार की नजर में उनकी स्थिति “कीड़े-मकौड़ों” जैसी हो गई है और उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही।
भीषण गर्मी के बीच प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी पिलाकर संभाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बनारस से आए अभ्यर्थी कैलाश नाथ मौर्य ने कहा कि वे अब पूरी तरह निराश हो चुके हैं और यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो सामूहिक आत्मदाह जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में फैसला आने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। उनका कहना है कि आर्थिक और मानसिक दबाव के कारण परिवार टूटने की स्थिति में पहुंच गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पुराने बयान पर भी नाराजगी जताई और कहा कि भर्ती अभ्यर्थियों के खिलाफ की गई टिप्पणियां बेहद अपमानजनक हैं।
जौनपुर से आए नवलेश नामक अभ्यर्थी ने कहा कि वे कई वर्षों से लखनऊ और दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला। उन्होंने सरकार से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में सरकारी वकील जरूर उपस्थित हों। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और भविष्य की भी बन चुकी है।
देवरिया से आए धनंजय गुप्ता ने कहा कि पिछड़े और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। उनका आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट में अब तक कई तारीखों पर सरकारी पक्ष की ओर से कोई प्रभावी पैरवी नहीं हुई। अभ्यर्थियों ने कहा कि तपती धूप में सड़क पर लेटना उनकी मजबूरी है, क्योंकि लंबे समय से न्याय की उम्मीद अधूरी पड़ी है।