लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के एक गुरुकुल से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 11 वर्षीय मासूम दिव्यांश की दाखिले के मात्र सात दिन बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जब बच्चे का शव घर लाया गया, तो उसके शरीर पर बर्बरता और यातना के गहरे निशान मौजूद थे।
घटना का विवरण और गिरफ्तारी:
महराजगंज के गौरैया गांव निवासी नरेंद्र कुमार द्विवेदी ने अपने बेटे दिव्यांश का दाखिला 15 अप्रैल को लखनऊ स्थित रामानुज भगवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में कराया था। उन्हें बताया गया था कि यहाँ मुफ्त वैदिक शिक्षा दी जाती है। 22 अप्रैल को अचानक परिवार को दिव्यांश की मौत की खबर मिली। पुलिस जांच के अनुसार, गुरुकुल के प्रबंधक कन्हैया लाल मिश्रा द्वारा की गई बेरहमी से पिटाई के कारण बच्चे की जान गई। पुलिस ने प्रबंधक और उसकी महिला मित्र हर्षिता सोनिया को गिरफ्तार कर लिया है। हर्षिता पर साक्ष्य मिटाने और अन्य शिष्यों को घर भेजने का आरोप है।
परिजनों के गंभीर आरोप:
दिव्यांश के पिता के अनुसार, मंगलवार रात को बच्चे ने अपनी बहन से फोन पर बात की थी, लेकिन अगली सुबह उसकी मौत की सूचना दी गई। जब शव घर पहुँचा, तो परिजनों ने देखा कि:
बच्चे के शरीर पर बेंत से पिटाई के करीब 39 से 40 गहरे निशान थे।
हाथ-पैर रस्सियों से बांधे जाने और गंभीर यातना दिए जाने के संकेत मिले।
गुरुकुल संचालक ने फोन पर बच्चे के सीढ़ियों से गिरने की झूठी कहानी गढ़ी थी।
संदिग्ध आचरण:
गुरुकुल संचालक की भूमिका तब और संदिग्ध हो गई जब वह घायल बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय, उसके शव को कार में लादकर कानपुर स्थित उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस अब उस अज्ञात ड्राइवर की भी तलाश कर रही है जो घटना के समय प्रबंधक के साथ मौजूद था।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। स्थानीय लोगों और परिजनों में इस अमानवीय कृत्य को लेकर भारी आक्रोश है, जिसके बाद गुरुकुल की सुरक्षा व्यवस्था और वहां दी जा रही शिक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।