लखनऊ न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार दोपहर करीब 3:15 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से तेज धूप और उमसभरी गर्मी से लोग परेशान थे, लेकिन दोपहर में काले बादल छा गए और तेज बारिश शुरू हो गई। वहीं, सोमवार देर रात महराजगंज और देवरिया में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।
दूसरी ओर, प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश का असर प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर पर दिख रहा है, जहां पानी घाटों पर बनी दुकानों तक पहुंच गया है। बिजनौर में मालन नदी का जलस्तर बढ़ने से कई छोटे पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है।
बलिया में सरयू और घाघरा नदी के किनारों पर कटान शुरू हो गई है। बांसडीह क्षेत्र में हालात बिगड़ने के बाद करीब 150 परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। वहीं, बागपत में यमुना नदी के तेज बहाव में 14 वर्षीय लड़का बह गया, जिसे स्थानीय लोगों ने नदी में कूदकर सुरक्षित बाहर निकाला।
मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से आ रही सूखी हवाओं के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसूनी बादल कमजोर पड़ गए हैं। इसके चलते अगले 6 से 7 दिनों तक पश्चिमी यूपी में बारिश की गतिविधियां सीमित रह सकती हैं, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश जारी रहने की संभावना है।
पिछले 24 घंटों में प्रदेश के केवल 11 शहरों में बारिश रिकॉर्ड की गई। जहां औसतन 9.7 मिमी बारिश का अनुमान था, वहां सिर्फ 1.5 मिमी वर्षा हुई। 1 जून से 14 जुलाई तक उत्तर प्रदेश में कुल 163.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 22 फीसदी कम है। इस दौरान महराजगंज में सबसे अधिक 49.3 मिमी और सिद्धार्थनगर में 37.5 मिमी बारिश हुई।
लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने और सूखी हवाओं के प्रभाव से बारिश का सिलसिला कमजोर हुआ है। हवा में नमी अधिक होने से उमस बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जैसे ही बंगाल की खाड़ी या अन्य क्षेत्रों में नया मौसमी सिस्टम सक्रिय होगा, प्रदेश में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो जाएंगी।