लखनऊ न्यूज डेस्क: दिल्ली से लखनऊ का सफर अब सिर्फ 2 घंटे 12 मिनट में पूरा हो सकेगा। प्रस्तावित नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के तहत यह सफर इतना कम समय में तय करने की योजना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर को वाराणसी में इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दिए जाने के बाद मंत्री ने अलग-अलग शहरों के बीच यात्रा में लगने वाले अनुमानित समय के बारे में बताया। हालांकि, ये अभी संभावित समय हैं। रेलवे ने ट्रेन का फाइनल टाइम टेबल या संचालन शुरू होने की तारीख जारी नहीं की है।
दिल्ली से लखनऊ 2 घंटे 12 मिनट में, दूसरे शहरों का सफर भी होगा कम
प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। दिल्ली से कानपुर पहुंचने में 1 घंटा 45 मिनट और दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में 2 घंटे 12 मिनट लग सकते हैं। वहीं, लखनऊ से वाराणसी का सफर 1 घंटा 21 मिनट और वाराणसी से दिल्ली का सफर 3 घंटे 35 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। फिलहाल वंदे भारत एक्सप्रेस से दिल्ली-लखनऊ का सफर करीब 6 घंटे 25 मिनट में पूरा होता है। तेजस एक्सप्रेस को लगभग 6 घंटे 35 मिनट और स्वर्ण शताब्दी को करीब 6 घंटे 50 मिनट लगते हैं। ऐसे में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से यात्रियों का करीब 4 घंटे 13 मिनट तक का समय बच सकता है। हालांकि, असल यात्रा का समय रूट और संचालन की योजना तय होने के बाद ही साफ होगा।
दिल्ली से गुवाहाटी तक जुड़ेगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
प्रस्तावित नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई बड़े शहर हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। इस रूट से पर्यटन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। आगरा में ताजमहल, अयोध्या और वाराणसी के धार्मिक स्थल, प्रयागराज का त्रिवेणी संगम और कुंभ मेला जैसे प्रमुख स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है। वहीं, पटना से बिहार के ऐतिहासिक और बौद्ध स्थलों तक जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग और सिक्किम जैसे इलाकों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। गुवाहाटी तक विस्तार होने से पूर्वोत्तर भारत को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
मेक इन इंडिया के तहत बनेगा कॉरिडोर, किराया किफायती रखने की बात
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को मेक इन इंडिया के तहत देश की तकनीक और निर्माण क्षमता के इस्तेमाल से तैयार किया जाएगा। कॉरिडोर के निर्माण में पिलर बनाने से लेकर गर्डर लगाने तक के काम में भारतीय इंजीनियर, कर्मचारी और वेल्डर अहम भूमिका निभाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन का फायदा सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं, मध्यम वर्ग और छोटे उद्योगों से जुड़े कारीगरों को भी इसका लाभ मिलेगा। टिकट का किराया हवाई सफर के मुकाबले कम और किफायती रखने की बात कही गई है, हालांकि अभी किराये का ढांचा तय नहीं हुआ है। इससे पहले केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी समेत हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की योजनाओं का जिक्र किया गया था। उस समय दिल्ली-वाराणसी के बीच करीब 3 घंटे 50 मिनट और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच 2 घंटे 55 मिनट का अनुमान दिया गया था। अब वाराणसी-दिल्ली के लिए 3 घंटे 35 मिनट का नया अनुमान सामने आया है। फिलहाल कॉरिडोर का विस्तृत रूट, स्टेशन, निर्माण लागत, काम शुरू होने और ट्रेन सेवा शुरू होने की तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है।