लखनऊ न्यूज डेस्क: कोई दूसरों की जान बचाने के लिए जलती हुई इमारत में घुस गया, तो किसी ने अपराधियों के चंगुल से एक कारोबारी को छुड़ाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। उत्तर प्रदेश पुलिस के ऐसे छह बहादुर जवानों की शहादत की कहानी पुलिस स्मृति दिवस पर हर किसी की आंखें नम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज लखनऊ पुलिस लाइंस में इन शहीदों के परिवारों को सम्मानित कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
देशभर में 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच ड्यूटी के दौरान 154 पुलिसकर्मियों की जान गई। इनमें उत्तर प्रदेश के छह जवान शामिल थे। ये सभी दो अलग-अलग घटनाओं में शहीद हुए। पहली घटना ग्रेटर नोएडा की एक फैक्ट्री में लगी भीषण आग की थी, जहां दो पुलिसकर्मियों ने लोगों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। दूसरी घटना जालौन के एक कारोबारी के अपहरण से जुड़ी थी। उसे अपराधियों के चंगुल से बचाने जा रहे चार पुलिसकर्मियों की सड़क हादसे में मौत हो गई।
ग्रेटर नोएडा की फैक्ट्री में आग बुझाते हुए शहीद हुए दो जवान
ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी चिप बनाने वाली फैक्ट्री में रात करीब 3 बजे अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों और जहरीले धुएं ने पूरी इमारत को घेर लिया। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। आग बुझाने वाली टीम में तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव भी शामिल थे।
फैक्ट्री में केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने के कारण आग पर काबू पाना काफी मुश्किल था। धुएं की वजह से कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बावजूद जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी की पाइप लेकर इमारत के अंदर कदम रखा। रोहित यादव सबसे आगे बढ़कर आग की लपटों पर पानी डाल रहे थे, जबकि तीर्थपाल सिंह पानी का दबाव और सप्लाई बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, ताकि बाकी जवान भी अंदर बढ़ सकें।
काफी मशक्कत के बाद टीम आग पर काबू पाने के करीब पहुंच गई थी। तभी तेज गर्मी के कारण फैक्ट्री की एक मजबूत दीवार और लोहे का भारी बीम कमजोर होकर अचानक गिर पड़े। मलबे के नीचे तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव समेत पांच जवान दब गए। चारों तरफ आग की तपिश, घना धुआं और मदद के लिए चीख-पुकार मच गई। साथी जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और काफी कोशिशों के बाद सभी को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद रोहित यादव और ड्राइवर तीर्थपाल सिंह की जान नहीं बच सकी।
इस हादसे के बीच राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि फैक्ट्री में काम करने वाले सभी 450 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। शहीद रोहित यादव महज 32 साल के थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं। वहीं, 48 साल के तीर्थपाल सिंह अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं।
जालौन के कारोबारी को बचाने जा रहे चार पुलिसकर्मियों की हादसे में मौत
जालौन के प्रॉपर्टी कारोबारी विजेंद्र मोर का अपहरण कर लिया गया था। शक था कि करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा करने के लिए उनके अपहरण और हत्या की साजिश रची गई थी। पुलिस को सूचना मिली कि कारोबारी को हरियाणा ले जाया गया है। इसके बाद उनकी तलाश में पांच लोगों की टीम रवाना हुई। इसमें सब-इंस्पेक्टर मोहित कुमार यादव, सब-इंस्पेक्टर सत्यभान सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल प्रदीप कुमार और विजेंद्र के रिश्तेदार अमरीक सिंह शामिल थे।
पांचों लोग स्कॉर्पियो गाड़ी से हरियाणा के जींद की तरफ जा रहे थे। उन्हें कारोबारी की तलाश में छापा मारना था, लेकिन नूंह के पास केएमपी एक्सप्रेसवे पर उनकी गाड़ी बेकाबू हो गई और दूसरी गाड़ी से टकरा गई। इस भीषण हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दोनों सब-इंस्पेक्टर सत्यभान सिंह और मोहित यादव के साथ कांस्टेबल प्रदीप कुमार और अशोक कुमार भी शामिल थे।
बाद में जांच में सामने आया कि श्रीभगवान, संजीव उर्फ कोकिला, मोहित मलिक और अमरजीत सुहाग ने विजेंद्र को जबरन क्रेटा गाड़ी में बैठाकर अगवा किया था। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई और शव को हमीरपुर के जलालपुर थाना क्षेत्र के कुपरा जंगल में ले जाया गया। आरोपियों ने शव पर करीब 40 लीटर डीजल डालकर आग लगा दी, ताकि मृतक की पहचान न हो सके और सबूत मिटाए जा सकें।
29 जुलाई को पुलिस ने कदौरा के चितैला फार्महाउस से मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान मोहित ने कारोबारी की हत्या करने की बात कबूल की और शव ठिकाने लगाने की जगह भी बताई। मोहित और सपना से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने कुपरा जंगल से एक कंकाल बरामद किया, जिसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इन घटनाओं में शहीद हुए छह पुलिसकर्मियों का बलिदान उन लोगों की याद दिलाता है, जिन्होंने दूसरों की जान बचाने और अपना फर्ज निभाने के लिए अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा दी।