लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। इस हादसे में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय सुखमनी सिंह की आखिरी बातचीत अब उनके परिजनों के लिए दर्दनाक याद बन गई है। आग लगने के दौरान सुखमनी ने अपने पिता को फोन कर कहा था, “पापा, यहां आग लग गई है, मुझे बचा लीजिए।” लेकिन मदद पहुंचने से पहले ही वह इस हादसे का शिकार हो गए। इस भीषण आग में कम से कम 15 छात्रों और युवाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इमारत के भूतल पर स्थित दुकानों से शुरू हुई और देखते ही देखते पूरे भवन में फैल गई। घना धुआं भर जाने के कारण कई लोग अंदर फंस गए, जबकि कुछ ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। हादसे में घायल 24 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से 15 को मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों के परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी राहत और बचाव कार्य किया जाता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव और अब्दुल रहमान के परिवार भी गहरे सदमे में हैं। आदित्य की मां ने आरोप लगाया कि समय पर सहायता मिलती तो उनके बेटे सहित कई लोगों की जान बच सकती थी। वहीं अब्दुल रहमान अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां गृहिणी हैं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण, बिजली विभाग और फायर विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और भवन के चार संयुक्त मालिकों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि भवन को वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के कारण ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया गया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन में विद्युत भार के अनुरूप वायरिंग नहीं थी और आपातकालीन निकास का भी अभाव था, जिससे यह त्रासदी और भयावह हो गई।