लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर मंगलवार सुबह टाटा प्रोजेक्ट्स की तीन मंजिला अस्थायी लेबर कॉलोनी में भीषण आग लग गई। करीब 6:50 बजे लगी आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा ढांचा लपटों की चपेट में आ गया। कैंप एयरपोर्ट से करीब 800 मीटर दूर था और यहां एयरपोर्ट के निर्माण कार्य में लगे मजदूर रहते थे। आग और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
आग से बचकर निकलने के दौरान दो मजदूर घायल हो गए। उनकी पहचान बिहार के सहरसा निवासी 30 वर्षीय निर्मल और प्रतापगढ़ के सलीपुर निवासी 26 वर्षीय राहुल कुमार के रूप में हुई है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, हालांकि फायर विभाग के मुताबिक दोनों को झुलसने की चोट नहीं आई है। कैंप में कुल 33 कमरे थे, हर मंजिल पर 11 कमरे और यहां करीब 500 मजदूरों के रहने की क्षमता थी। घटना के समय कैंप में कितने मजदूर मौजूद थे, इसकी जानकारी अधिकारियों ने नहीं दी, लेकिन सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
आग बुझाने के लिए एयरपोर्ट की रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग टीम ने तुरंत डोमेस्टिक फायर टेंडर भेजा। इसके साथ एयरपोर्ट का क्रैश फायर टेंडर और उत्तर प्रदेश फायर सर्विस की गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं। फायर सर्विस मुख्यालय से हाल ही में शामिल किया गया 22 हजार लीटर क्षमता वाला वॉटर बॉउजर भी ऑपरेशन में लगाया गया। दमकलकर्मियों ने पहली और दूसरी मंजिल तक पहुंचकर आग पर काबू पाया। इस दौरान दो एलपीजी सिलेंडर भी फट गए, जिससे बचाव टीम के लिए खतरा बढ़ गया। करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया और उसे आसपास के इलाकों तक फैलने से रोक लिया गया। चीफ फायर ऑफिसर अंकुश मित्तल ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की निगरानी की।
बाद की जांच में सामने आया कि आग बैरक नंबर 9 से शुरू हुई थी, जहां खाना बनाया जा रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मजदूर एलपीजी सिलेंडर से खाना तैयार कर रहे थे। एक अधिकारी के अनुसार, टाटा प्रोजेक्ट्स ने बताया कि कंपनी मजदूरों के लिए खाना उपलब्ध कराती है और लेबर कॉलोनी में ज्वलनशील सामान या बिना अनुमति खाना बनाने की व्यवस्था पर रोक है। मजदूरों को सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए पहले भी निर्देश दिए गए थे। आग में पूरा अस्थायी ढांचा जलकर खराब हो गया। घटना के बाद टाटा प्रोजेक्ट्स ने एहतियात के तौर पर प्रभावित मजदूरों को नए बैरक और शेल्टर में शिफ्ट कर दिया है।