लखनऊ न्यूज डेस्क: स्वच्छ हवा के मामले में लखनऊ ने इंदौर को सिर्फ एक अंक से पीछे छोड़ते हुए 2026 के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहला स्थान हासिल किया है। एक मिलियन से ज्यादा आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में लखनऊ को 200 में से 198 अंक मिले, जबकि इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के पांचवें संस्करण में जारी की गई।
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक, शहर एक अंक से इसलिए पिछड़ गया क्योंकि पीएम10 के मानकों को लेकर प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा। पीएम10 में धूल, वाहनों के धुएं और औद्योगिक प्रदूषण से निकलने वाले बेहद छोटे कण शामिल होते हैं, जो सांस से जुड़ी दिक्कतों का कारण बन सकते हैं। हालांकि इंदौर में पीएम10 का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में 15 फीसदी से ज्यादा कम हुआ है और सर्वे की अवधि में 98 फीसदी से ज्यादा दिनों तक एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से नीचे रहा।
लखनऊ ने प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया, जिसका फायदा उसकी रैंकिंग में दिखाई दिया। शहर में करीब 90 फीसदी डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाले वाहन इलेक्ट्रिक हैं। यहां 140 इलेक्ट्रिक बसें और कचरा उठाने के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहन हैं। सड़क की धूल कम करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मशीनों से सफाई की जा रही है। करीब 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का किया गया है और नगर निगम के कचरे के 100 फीसदी वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था का दावा किया गया है। इसके अलावा मियावाकी प्लांटेशन और वर्टिकल गार्डन के जरिए हरियाली बढ़ाने पर भी काम हुआ है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के तहत नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के 130 शहरों का हर साल आकलन किया जाता है। एक मिलियन से ज्यादा आबादी वाले शहरों में लखनऊ के बाद इंदौर, जबलपुर, भोपाल और आगरा 192-192 अंकों के साथ और सूरत 191 अंकों के साथ रहा। हालांकि अच्छी रैंकिंग का मतलब यह नहीं है कि शहरों ने एयर क्वालिटी के सभी राष्ट्रीय मानक हासिल कर लिए हैं। लखनऊ में पीएम10 का सालाना स्तर 2017-18 के 250 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर 137 माइक्रोग्राम हुआ है, लेकिन यह अब भी 60 माइक्रोग्राम के राष्ट्रीय मानक से ज्यादा है। वहीं 2025-26 में 108 शहरों में पीएम10 का स्तर 2017-18 के मुकाबले कम हुआ, लेकिन इनमें सिर्फ 14 शहर ही राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे।