लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के टूटने और धंसने की खबरों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे ज्यादा समस्या करीब 60 से 64 किलोमीटर के हिस्से में सामने आई है, जहां करीब 200 मीटर क्षेत्र में मरम्मत चल रही है और लगभग 100 मीटर सड़क को दोबारा बनाया जा रहा है। बारिश के बाद इस हिस्से में पानी का रिसाव होने से सड़क धंसने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़क के फाउंडेशन में मिट्टी और गिट्टी की परतों को सही तरीके से बिछाकर दबाया नहीं गया होगा तो बारिश का पानी नीचे तक पहुंच सकता है। इससे सड़क की पकड़ कमजोर होने लगती है और दरारें व गड्ढे बनने लगते हैं। एक्सप्रेस-वे के किनारे बने शोल्डर में भी धंसाव मिला है। कुछ जगह नालियां टूटने से पानी सड़क की ओर आने और बिटुमिन को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, खराबी की असली वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई ने तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया को निलंबित करने के साथ डिबार किया है। मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल वर्मा को भी पद से हटा दिया गया, जबकि स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम के लीडर पर भी कार्रवाई की गई है। निर्माण एजेंसी को दो कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। एनएचएआई के अनुसार पूरे एक्सप्रेस-वे पर समस्या नहीं है और करीब एक किलोमीटर के हिस्से में जल रिसाव की शिकायत मिली है। समझौते के तहत निर्माण कंपनी को अगले 15 साल तक सड़क का रखरखाव करना है।
63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर करीब 4700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, यानी करीब 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर। इसका निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक ने किया है। कंपनी के मालिक प्रदीप जैन हैं, जो भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई हैं। कंपनी को फरवरी 2022 में इसका ठेका मिला था और अक्टूबर 2024 में सीबीआई से जुड़े एक मामले के कारण नए टेंडर में शामिल होने पर प्रतिबंध भी लगाया गया था। अब सड़क में आई खराबियों की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।