लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ की एक सत्र अदालत ने विचाराधीन कैदियों को समय पर अदालत में पेश नहीं किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। जेल प्रशासन ने अदालत को बताया कि पिछले तीन महीनों में पुलिस बल की कमी के कारण 19 बार कैदियों को सुनवाई के लिए अदालत में पेश नहीं किया जा सका।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविंद्र प्रसाद गुप्ता ने जेल अधीक्षक की ओर से दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए नया नोटिस जारी किया है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 269 के तहत कैदियों को अदालत में पेश करने के लिए की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा है।
यह मामला विचाराधीन कैदी विजय वर्मा से जुड़ा है। अदालत ने पहले भी कहा था कि साक्ष्य दर्ज होने के दौरान आरोपी की अदालत में मौजूदगी उसका कानूनी अधिकार है। इसके बावजूद बार-बार कैदी को पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने जेल प्रशासन और रिजर्व पुलिस लाइन से जवाब तलब किया था।
13 जुलाई को जारी नोटिस के जवाब में जेल अधीक्षक ने बताया कि 21 अप्रैल से 13 जुलाई के बीच पर्याप्त पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण 19 बार कैदियों को अदालत नहीं लाया जा सका।
हालांकि, अदालत ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना और मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त तय की है। साथ ही अदालत ने अपने आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि भविष्य में कैदियों को समय पर अदालत में पेश करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।