लखनऊ न्यूज डेस्क: राज्य में शराब कारोबार की संरचना में किए गए बदलाव से सरकार को बड़ा फायदा हुआ है। एक्साइज ड्यूटी से मिलने वाला सालाना राजस्व करीब 12% बढ़ गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां शराब से 52,573 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 59,000 करोड़ रुपये पहुंच गई।
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह “कॉम्पोजिट शराब दुकानों” की व्यवस्था मानी जा रही है। अब एक ही काउंटर से विदेशी शराब (व्हिस्की, वोडका, रम आदि) और बीयर की बिक्री की अनुमति मिलने से ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। पहले 1 अप्रैल 2025 तक अलग-अलग दुकानों से शराब की बिक्री होती थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद 27,308 लाइसेंस जारी किए गए, जिससे बाजार का दायरा और बड़ा हो गया।
राज्य के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि सरकार लगातार शराब की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे रही है, जबकि कीमतों को स्थिर रखा गया है। वहीं आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह के अनुसार, नई नीति से उद्योग को बढ़ावा मिला है और निवेश व निर्यात को भी प्रोत्साहन मिला है।
एक और सकारात्मक संकेत यह है कि पिछले साल ऑनलाइन लॉटरी से आवंटित दुकानों में से 94% का नवीनीकरण हो चुका है। कई व्यापारियों ने दोबारा लाइसेंस लेने के लिए 7.5% अतिरिक्त शुल्क भी दिया। अधिकारियों के मुताबिक अंतिम आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि कुछ जिलों से राजस्व का मिलान अभी जारी है। शेष दुकानों के लिए अगला लॉटरी ड्रॉ 9 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।