लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के जवाहर भवन में सोमवार सुबह लगी भीषण आग ने कई सरकारी विभागों का कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया। आग लगते ही भवन में मौजूद सैकड़ों कर्मचारियों को तुरंत बाहर निकाला गया। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को खाली कराकर प्रवेश पर रोक लगा दी, जिससे कर्मचारी घंटों तक बारिश के बीच भवन के बाहर खड़े रहे।
जब तक अधिकांश कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, तब तक इमारत की ऊपरी मंजिलों से काला धुआं उठने लगा था। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने के साथ-साथ बचाव अभियान शुरू किया गया। कर्मचारी अपने कार्यालयों और जरूरी सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।
कर्मचारी सूरज सिंह ने बताया कि वह कार्यालय पहुंचकर अपनी सीट पर बैठे ही थे कि अचानक आग लगने की सूचना मिली। कुछ ही सेकंड में फायर अलार्म बजने लगा और सुरक्षा कर्मियों ने सभी को तुरंत बाहर निकलने के निर्देश दिए। जल्दबाजी में उन्हें अपना सामान तक अंदर छोड़ना पड़ा। बाहर आने तक चौथी मंजिल से घना धुआं उठने लगा था।
एक अन्य कर्मचारी राम बाबू ने कहा कि आग ऐसे समय लगी जब कैंटीन में भीड़ नहीं थी। उनके अनुसार, यदि यह घटना आधा घंटा बाद होती, तो चाय-नाश्ते के समय कैंटीन और कॉन्फ्रेंस हॉल में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद होते, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।
कर्मचारी मनीष कुमार और सुनील पाल ने बताया कि धुआं उठने के कुछ देर बाद तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। उन्होंने बताया कि कैंटीन में एलपीजी सिलेंडर मौजूद थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि उनमें विस्फोट नहीं हुआ। उनका मानना है कि आग की वजह से किसी एयर कंडीशनर के फटने से यह आवाज आई होगी। उन्होंने कहा कि दमकल और सुरक्षा कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से आग को समय रहते नियंत्रित किया जा सका।
बचाव अभियान के दौरान कई कर्मचारी अपने साथियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश करते रहे। वहीं, दमकलकर्मी विशेष सुरक्षा उपकरण पहनकर धुएं से भरी मंजिलों में पहुंचकर तलाशी और राहत कार्य में जुटे रहे। सभी कर्मचारियों के सुरक्षित बाहर निकलने की पुष्टि के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, हालांकि सरकारी फाइलों, कंप्यूटरों और अन्य रिकॉर्ड को हुए नुकसान को लेकर चिंता बनी हुई है।