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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, इटावा के DFO विकास नायक और चालक की मौत

Photo Source : Google

Posted On:Tuesday, September 29, 2026

लखनऊ न्यूज डेस्क: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को हुए सड़क हादसे में इटावा के डीएफओ विकास नायक और उनके चालक देवांश की जान चली गई। हादसा फिरोजाबाद के नगला खंगर थाना क्षेत्र में किलोमीटर नंबर 69 के पास हुआ। डीएफओ की एक्सयूवी-700 में उनके साथ 65 वर्षीय केशवती भी थीं, जो हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं। वहीं, दूसरी गाड़ी स्कॉर्पियो में सवार पति-पत्नी डेविड ब्रेन डिसूजा और ममता डिसूजा भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में इलाज चल रहा है।

पुलिस के मुताबिक, 36 वर्षीय विकास नायक मूल रूप से राजस्थान के नागौर के रहने वाले थे और अपने चालक 25 वर्षीय देवांश के साथ लखनऊ से नोएडा की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। दूसरी तरफ स्कॉर्पियो में सवार 61 वर्षीय डेविड ब्रेन डिसूजा और उनकी 59 वर्षीय पत्नी ममता डिसूसा गुरुग्राम से लखनऊ जा रहे थे। दोनों राजारहाट, उत्तर कोलकाता के रहने वाले हैं। सूचना मिलते ही एक्सप्रेसवे सुरक्षा टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और हादसा कैसे हुआ, इसकी जांच की जा रही है।

विकास नायक जून 2025 में इटावा के डीएफओ बनकर आए थे। उनके कार्यकाल में सारस संरक्षण, सरसईनावर झील के विकास और सिटी फॉरेस्ट से जुड़े कामों पर खास ध्यान दिया गया। इटावा सफारी के पास संरक्षित वन भूमि में बनी मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार से जुड़े मामले में भी वे चर्चा में आए थे। वन अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्य नहीं मिलने के बाद उनके आदेश पर वन विभाग ने मजार को ध्वस्त कराया था। इस कार्रवाई के बाद उन्हें एक सख्त और तेज-तर्रार अधिकारी के तौर पर देखा जाने लगा था।

विकास नायक का जन्म 11 नवंबर 1990 को राजस्थान के नागौर में हुआ था। बीटेक करने के बाद 2019 में उनका भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस में चयन हुआ और बाद में वे डीएफओ बने। उनके निधन की खबर से वन विभाग में शोक का माहौल है। जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने इसे जिले के लिए बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि विकास नायक अच्छे अधिकारी थे और उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण काम हुए। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने भी दुख जताया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन नीतियों को लागू करने, वन्यजीव संरक्षण और सारस के संरक्षण को लेकर उनकी अच्छी समझ थी और उनका काम लंबे समय तक याद किया जाएगा।


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