लखनऊ न्यूज डेस्क: 13 जुलाई को उद्घाटन से पहले ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों पर एक्सप्रेसवे की फेंसिंग और सुरक्षा जालियां काटकर अवैध रास्ते बनाने का आरोप लगा है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर यहां भी कई जगहों पर ग्रामीणों ने एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए सुरक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
एनएचएआई के अनुसार, बिना निर्धारित मार्ग के करीब 30 फीट ऊंचे एक्सप्रेसवे तक पहुंचना आसान नहीं है। ऐसे में कुछ ग्रामीणों पर एक्सप्रेसवे के साइड सपोर्ट में डाली गई मिट्टी को भी खोदने का आरोप है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एनएचएआई ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
मानसून के सक्रिय होने के बावजूद जिले में अभी तक भारी बारिश नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद एक्सप्रेसवे के किनारों पर किए गए साइड सपोर्ट के काम कई जगह टूटते, फटते और बहते नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर मिट्टी बहने से बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
इसके अलावा मवेशियों और ग्रामीणों को निर्धारित रास्तों के अलावा एक्सप्रेसवे पर आने से रोकने के लिए लगाई गई सुरक्षा जालियां और ग्रिलें भी पुरवा क्षेत्र सहित कई स्थानों पर काट दी गई हैं। पांच से 15 फीट तक जालियां गायब होने की घटनाएं सामने आई हैं। उद्घाटन से ठीक एक सप्ताह पहले सामने आई इन खामियों ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा और मजबूती को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।