लखनऊ न्यूज डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को लखनऊ पुलिस को निर्देश दिया कि कथित उत्पीड़न और हिंसा की शिकायत करने वाले कम से कम तीन अधिवक्ताओं, जिनमें दो महिला वकील भी शामिल हैं, को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम करीब 7 बजे विशेष सुनवाई के दौरान दिया।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने की। दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि जब वे एक दीवानी मामले की सुनवाई के लिए लखनऊ की अदालत पहुंचे, तब अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और उनके सहयोगियों ने उन्हें पेश होने से रोकने का प्रयास किया।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के साथ मारपीट की गई और उन्हें धमकाते हुए कहा गया, "वकील के खिलाफ केस करेगा तू।" यह विवाद एक संपत्ति से जुड़े दीवानी मुकदमे से संबंधित है, जिस पर वर्तमान में अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा का कब्जा बताया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि लखनऊ की अदालतों में इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं। अदालत ने माना कि मामला केवल कथित आपराधिक कृत्य का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का भी है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
कोर्ट ने लखनऊ के जिला जज को पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस आयुक्त को अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और मामले से जुड़े अन्य वकीलों के आपराधिक और अन्य रिकॉर्ड की जानकारी अदालत में पेश करने के लिए कहा गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिवक्ताओं ने सुरक्षा की मांग की है, उन्हें लखनऊ में रहने और न्यायालय में पेश होने तक पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही हाईकोर्ट में उनकी सुरक्षित एंट्री और पेशी सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ रजिस्ट्रार को भी आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।