भारतीय रेलवे के राजस्व विभाग द्वारा जारी वित्त वर्ष 2025-26 की ताजा रिपोर्ट ने रेल जगत के जानकारों और यात्रियों, दोनों को हैरान कर दिया है। अब तक यह माना जाता था कि वंदे भारत, राजधानी और शताब्दी जैसी आधुनिक और प्रीमियम ट्रेनें ही रेलवे के खजाने को सबसे ज्यादा भरती हैं। लेकिन इस साल के आंकड़ों ने एक नया इतिहास रच दिया है। डॉ. आंबेडकर नगर (महू)-प्रयागराज एक्सप्रेस कमाई के मामले में देश की नंबर-1 ट्रेन बनकर उभरी है।
वंदे भारत को मिला तगड़ा मुकाबला
आंकड़ों के अनुसार, डॉ. आंबेडकर नगर एक्सप्रेस ने चालू वित्त वर्ष में ₹40.56 करोड़ का प्रभावशाली राजस्व अर्जित किया है। वहीं, आधुनिक सुविधाओं से लैस हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस करीब ₹31 करोड़ की कमाई के साथ इस दौड़ में काफी पीछे रह गई है। सूची में दूसरे स्थान पर खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस रही, जिसने ₹39 करोड़ का व्यवसाय किया, जबकि दिग्गज मानी जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस तीसरे पायदान पर खिसक गई है।
आखिर क्यों बदली राजस्व की तस्वीर?
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 'कनेक्टिविटी और क्षमता' का हाथ है।
- लंबी दूरी और अधिक स्टॉपेज: यह ट्रेन मालवा अंचल को उत्तर प्रदेश के प्रमुख केंद्रों से जोड़ती है, जिससे इसमें साल भर 'वेटिंग लिस्ट' रहती है।
- किफायती सफर: प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में इसमें स्लीपर और थर्ड एसी की सीटें अधिक हैं, जो मध्यम वर्ग की पहली पसंद हैं।
- निरंतरता: प्रीमियम ट्रेनों के सीमित फेरों के मुकाबले यह एक्सप्रेस ट्रेन अपनी उच्च वहन क्षमता (Carrying Capacity) के कारण अधिक लाभदायक साबित हुई है।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारतीय रेल के लिए पारंपरिक लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें आज भी 'रीढ़ की हड्डी' बनी हुई हैं।